जनवरी के लिए चीनी बिक्री का कोटा १९.१८ लाख टन तय
नई दिल्ली-केंद्र सरकार ने जनवरी २०११ के लिए ओपन मार्केट बिक्री और राशन दुकानों के जरिये १९.१८ लाख टन चीनी उपलब्ध कराई है. चीनी की यह मात्रा मौजूदा महीने के लिए जारी की गई मात्रा से दो लाख टन जयादा है. सरकारी सूत्रों के अनुसार १९.१८ लाख टन की यह मात्रा जनवरी नैन चीनी की घरेलू मांग की पूरा करने के लिए पर्याप्त है. इसमें कहा गया है कि अगर चीनी कि कीमतों में असामान्य तेजी आती है तो सरकार अतिरिक्त मात्रा में चीनी जारी करने से परहेज नहीं करेगी. दिसम्बर में सरकार ने बाज़ार में १७.१८ लाख टन चीनी जारी की है.
इसीबीच १७ दिसम्बर से चीनी का वायदा कारोबार भी शुरु. जिससे चीनी का भाव बढ़ाना टी है. हालाँकि अभी से हाजिर बाज़ार में चीनी का भाव बढ़ना शुरु हो गया है.
रमाकांत चौधरी-आर्थिक पत्रकार-व्यापार-मुंबई.
Friday, December 24, 2010
Wednesday, December 22, 2010
श्री लंका में नारियल के भाव सौ % बढे
श्री लंका में नारियल के भाव सौ % बढे
दरअसल पिछले कुछ वर्षों में आम कृषकों ने आवासियों उपयोग के लिए नारियल के पेर्डों कि कटाई किये जाने से नारियल का उत्पादन घटा है और ऐसे में पिछले दो माह में नारियल के भाव दोगुने बढ़कर ६० रुपए किलो हो गया है. जबकि पिछले दो माह पूर्व नारियल ३० रुपए किलो बिक रहा था. जिससे अब श्री लंका सरकार ने नारियल के पेड़ों कि कतई पर रोक लगा दी है. इसीबीच नारियल के भाव पर अंकुश के लिए श्री लंका सरकार ने एक तरफ नारियल के निर्यात पर भी रोक लगा दी है और दूसरी तरफ भारत और मलेसिया से नारियल आयत कि मंजूरी भी दे दी है.
रमाकांत चौधरी-आर्थिक पत्रकार-व्यापार-मुंबई
अधिक जरकारी के लिए व्यापार-वार्ता.ब्लॉगस्पोट.कॉम पर संपर्क कर सकतें हैं.
दरअसल पिछले कुछ वर्षों में आम कृषकों ने आवासियों उपयोग के लिए नारियल के पेर्डों कि कटाई किये जाने से नारियल का उत्पादन घटा है और ऐसे में पिछले दो माह में नारियल के भाव दोगुने बढ़कर ६० रुपए किलो हो गया है. जबकि पिछले दो माह पूर्व नारियल ३० रुपए किलो बिक रहा था. जिससे अब श्री लंका सरकार ने नारियल के पेड़ों कि कतई पर रोक लगा दी है. इसीबीच नारियल के भाव पर अंकुश के लिए श्री लंका सरकार ने एक तरफ नारियल के निर्यात पर भी रोक लगा दी है और दूसरी तरफ भारत और मलेसिया से नारियल आयत कि मंजूरी भी दे दी है.
रमाकांत चौधरी-आर्थिक पत्रकार-व्यापार-मुंबई
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Tuesday, December 21, 2010
टाटा अब आई शक्ति ब्रांड दाल बेचेगी
टाटा अब आई शक्ति ब्रांड दाल बेचेगी
अब टाटा कि दालें भी बाज़ार में दस्तक देने वाली है.टाटा समूह कि टाटा कैमिकल्स ने दालों के ब्रांडेड कारोबार में उतरने कि घोषणा कि है. ये दालें आई शक्ति ब्रांड के नाम से बेची जाएगी.खासकर फुटकर दुकानों पर ९५/१०० रुपए किलो बिकेगी.
टाटा केमिकल के निदेशक आर मुकुंद ने कहा कि शुरुआत में कंपनी ने अरहर,चना और उरद कि दाल बाज़ार में उतरने कि योजना बनाई है. ये दालें सुरु में महाराष्ट्र,तमिलनाडु और गुजरात में उपलब्ध होंगीं. बहरहाल उत्तर भारत के उपभोक्ताओं को अगले साल तक ये डालें नीलने लगेगीं.
रमाकांत चौधरी-आर्थिक-पत्रकार-मुंबई.
अधिक जान्कारी के लिए अब व्यापार-वार्ता.ब्लॉग.स्पोट.कॉम पर संपर्क करें
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अब टाटा कि दालें भी बाज़ार में दस्तक देने वाली है.टाटा समूह कि टाटा कैमिकल्स ने दालों के ब्रांडेड कारोबार में उतरने कि घोषणा कि है. ये दालें आई शक्ति ब्रांड के नाम से बेची जाएगी.खासकर फुटकर दुकानों पर ९५/१०० रुपए किलो बिकेगी.
टाटा केमिकल के निदेशक आर मुकुंद ने कहा कि शुरुआत में कंपनी ने अरहर,चना और उरद कि दाल बाज़ार में उतरने कि योजना बनाई है. ये दालें सुरु में महाराष्ट्र,तमिलनाडु और गुजरात में उपलब्ध होंगीं. बहरहाल उत्तर भारत के उपभोक्ताओं को अगले साल तक ये डालें नीलने लगेगीं.
रमाकांत चौधरी-आर्थिक-पत्रकार-मुंबई.
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Monday, December 20, 2010
पोटा ब्रांड आलू का निर्यात
कोल्कता के पाईलन समूह ने अपने पोटा ब्रांड आलू के ४० टन टुकड़े का इजरायल को निर्यात किया. इस तरह से यह कोसर से प्रसंस्कृत सब्जियों का निर्यात करने वाला पश्चिम बंगाल का पहला समूह बन गया.
पाईलन समूह के चेयरमेन अपुर्ब साहा के अनुसार हमने १४ दिसम्बर को ४० टन पोटा आलू का निर्यात किया जिसका मूल्य 40 हज़ार डॉलर है. उन्होंने कहा कि पाईलन समूह कि अनुषंगी पाईलन फूड्स लिमिटेड ने वेल्जियम कि एक कंपनी से कोसर का प्रमाणपत्र हासिल किया है. कंपनी जल्द ही इजरायल को १२० टन पोटा आलू का निर्यात करेगी.
रमाकांत चौधरी-आर्थिक पत्रकार-मुंबई
पाईलन समूह के चेयरमेन अपुर्ब साहा के अनुसार हमने १४ दिसम्बर को ४० टन पोटा आलू का निर्यात किया जिसका मूल्य 40 हज़ार डॉलर है. उन्होंने कहा कि पाईलन समूह कि अनुषंगी पाईलन फूड्स लिमिटेड ने वेल्जियम कि एक कंपनी से कोसर का प्रमाणपत्र हासिल किया है. कंपनी जल्द ही इजरायल को १२० टन पोटा आलू का निर्यात करेगी.
रमाकांत चौधरी-आर्थिक पत्रकार-मुंबई
Friday, December 17, 2010
खोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा
खोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा
केंद्र सरकार ने आगामी सत्र के लिए खोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य ७५ रुपए किन्टल बढाया है. जिसके तहत अब मिलिंग खोपरा ४५२५ रुपए और बाल खोपरा ४७७५ रुपए हो गया है. दरअसल कृषि लागत और मूल्य आयोग की शिफारिश पर मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने इस आशय का निर्णय किया था. इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार का मानना है की खोपरा का न्यनतम समर्थन मूल्य बढ़ने से किसान नारियल की खेती करने के लिए अग्रसर होंगें और निवेश करेंगीं. इससे देश में नारियल का उत्पादन बढेगा.
धन्यवाद
रमा कान्त चौधरी-आर्थिक पत्रकार (व्यापार) मुंबई
केंद्र सरकार ने आगामी सत्र के लिए खोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य ७५ रुपए किन्टल बढाया है. जिसके तहत अब मिलिंग खोपरा ४५२५ रुपए और बाल खोपरा ४७७५ रुपए हो गया है. दरअसल कृषि लागत और मूल्य आयोग की शिफारिश पर मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने इस आशय का निर्णय किया था. इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार का मानना है की खोपरा का न्यनतम समर्थन मूल्य बढ़ने से किसान नारियल की खेती करने के लिए अग्रसर होंगें और निवेश करेंगीं. इससे देश में नारियल का उत्पादन बढेगा.
धन्यवाद
रमा कान्त चौधरी-आर्थिक पत्रकार (व्यापार) मुंबई
Thursday, July 22, 2010
स्टोव एवं पेट्रोमेक्स से वेट घटाने पर राष्ट्र मंडल खेलों के बाद वार्तालाप होगी
दिल्ली सरकार ने दिया आश्वाशन राष्ट्र मंडल खेलों के बाद स्टोव एवं पेट्रोमेक्स से वेट घटने पर वार्तालाप होगी
नई दिल्ली-दिल्ली की स्टोव एंड लाइट एसोसिएसन के अध्यक्ष श्री बाल कृषण वत्स के नेतृत्व में आठ सदस्ययी एक प्रतिनिधि मंडल ने वितीय वर्ष २०१०-११ के
नई दिल्ली-दिल्ली की स्टोव एंड लाइट एसोसिएसन के अध्यक्ष श्री बाल कृषण वत्स के नेतृत्व में आठ सदस्ययी एक प्रतिनिधि मंडल ने वितीय वर्ष २०१०-११ के
Tuesday, July 20, 2010
देश में सेब का उत्पादन ६ लाख टन होने की सम्भावना
नई दिल्ली-अनुकूल मौसम के कारण इस साल देश में सेब का उत्पादन लगभग दोगुने से अधिक यानी ६ लाख टन होने की सम्भावना है.जबकि पिछले साल २.८० लाख टन गुआ था.
हिमाचल सरकार में बघ्वानी विभाग के निदेशक गुरुदेव सिंह ने बताया की फल लगने के समय काफी नमी और तापमान अनुकूल रहने से इस बार सेब का उत्पादन बम्पर हुई है. श्री सिंह ने कहा की देश में सेब की कुल पैदावार में हिमाचल प्रदेश का ८५ प्रतिशत का योगदान है. खासकर सेब उत्पादक क्षेत्र शिमला,किन्नौर, मंडी और किल्लू जिलों में बध्याँ वर्षा होने से मिट्टी में नमी की मात्र बढ़ी है.जिससे फल पकने के समय पौधे को पोषक तत्व आसानी से मिलतें है. सेब के बेहतर उत्पादन के लिए फल लगाने के समय तापमान १८ से २४ डिग्री सेलिस्य्स होना चाहिए और वतावन में नमी भी होना छाए
इति
हिमाचल सरकार में बघ्वानी विभाग के निदेशक गुरुदेव सिंह ने बताया की फल लगने के समय काफी नमी और तापमान अनुकूल रहने से इस बार सेब का उत्पादन बम्पर हुई है. श्री सिंह ने कहा की देश में सेब की कुल पैदावार में हिमाचल प्रदेश का ८५ प्रतिशत का योगदान है. खासकर सेब उत्पादक क्षेत्र शिमला,किन्नौर, मंडी और किल्लू जिलों में बध्याँ वर्षा होने से मिट्टी में नमी की मात्र बढ़ी है.जिससे फल पकने के समय पौधे को पोषक तत्व आसानी से मिलतें है. सेब के बेहतर उत्पादन के लिए फल लगाने के समय तापमान १८ से २४ डिग्री सेलिस्य्स होना चाहिए और वतावन में नमी भी होना छाए
इति
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